ज़िन्दगी बक्शकर कोहरा थमा गए
अरसो की प्यास थी, आग लगा गए
इतनी सी ख्वाईश कि अफसोस जता गए
पलके जब खुली तो कोहरा थमा गए

राहे चल पड़ी तो मोड़ बना गए
गुफ़तगू सफ़र को तनहा बना गए
मेरी उम्र कि सिहाई कागज़ पर लुटा गए
आईने कि आरजू थी, कोहरा थमा गए